Friday, 5 May 2017

ये रात चाँदनी बनकर आँगन में आये,

ये रात चाँदनी बनकर आँगन में आये,
ये तारे लोरी गा कर आपको सुनाएं,
आयें आपको इतने प्यारे सपने यार...
कि नींद में भी आप हलके से मुस्कुराएं।
रात चाँदनी बनकर शायरी


आपके बिना रात...

जब भी आपके बिना रात होती हैं,
तब दीवारों से अक्सर बात होती हैं,
सन्नाटा पूछता हैं हमारा हाल हमसे,
तो आपके नाम से ही शुरुआत होती हैं।


उन्ही सपनो में...

इस कदर हम उनकी मोहब्बत में खो गए,
कि एक नज़र देखा और बस उन्ही के हो गए,
आँख खुली तो अँधेरा था देखा एक सपना था,
आँख बंद की और उन्ही सपनो में फिर खो गए।
शुभ रात्रि ।

सितारों की महफिल शायरी...

कितनी जल्दी ये शाम आ गई,
गुड नाइट कहने की बात याद अा गई,
हम तो बैठे थे सितारों की महफिल में,
चांद को देखा तो आपकी याद आ गई।
शुभ रात्रि

सलामती की दुआ...

जैसे चाँद का काम है रात में रौशनी देना,
तारों का काम है सारी रात चमकते रहना,
दिल का काम है अपनों की याद में धड़कते रहना,
हमारा काम है आपकी सलामती की दुआ करते रहना।
। शुभ रात्रि ।
हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,
चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।
हुस्न की इन्तेहाँ शायरी


हया से सर झुका लेना...

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना,
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना।
हया से सर झुका लेना शायरी


तेरी आँखें...

अब तक मेरी यादों से मिटाए नहीं मिटता,
भीगी हुई इक शाम का मंज़र तेरी आँखें।
तेरी आँखें शायरी

नाज़ुकी लब की...

नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है।
मीर तक़ी मीर
नाज़ुकी लब की शायरी

जलवे मचल पड़े...

जलवे मचल पड़े तो सहर का गुमाँ हुआ,
ज़ुल्फ़ें बिखर गईं तो स्याह रात हो गई।
जलवे मचल पड़े शायरी
दिल के हर कोने में बसाया है आपको,
अपनी यादों में हर पल सजाया है आपको,
यकीं न हो तो मेरी अॉखों में देख लीजिये,
अपने अश्कों में भी छुपाया है आपको।


दिल में बसाया आपको शायरी
तपिश से बच कर घटाओं में बैठ जाते हैं,
गए हुए की सदाओं में बैठ जाते हैं,
हम अपनी उदासी से जब भी घबराये,
तेरे ख़याल की छाँव में बैठ जाते हैं।
ख़याल की छाँव शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 27.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ऐ नए साल बता...

ऐ नए साल बता कि तुझमें नया क्या है,
हर तरफ खल्क ने क्यूँ शोर मचा रखा है।

तू नया है तो दिखा, सुबह नई शाम नई,
वर्ना इन आँखों ने देखे हैं ऐसे साल कई।

मौजूद थी उदासी...

मौजूद थी उदासी अभी पिछली रात की,
बहला था दिल जरा कि फिर रात हो गयी।
मौजूद थी उदासी शायरी

बताओ है कि नहीं...

बताओ है कि नहीं मेरे ख्वाब झूठे,
कि जब भी देखा तुझे अपने साथ देखा।


मत फेंक पानी में...

मत फेंक पानी में पत्थर,
उसे भी कोई पीता होगा,
मत रह यूँ उदास जिन्दगी में,
तुम्हें देखकर कोई जीता होगा।

ग़म छुपाऊं कैसे...

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है,
तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे।
ग़म छुपाऊं कैसे शायरी

देखा गम का साया...

जहाँ भी देखा गम का साया,
तू ही तू मुझको याद आया,

ख्वाबों की कलियाँ जब टूटी,
ये गुलशन लगने लगा पराया,

दरिया जब जब दिल से निकला,
एक समंदर आँखों में समाया,

मेरे दामन में कुछ तो देते,
यूँ तो कुछ नहीं माँगा खुदाया।


गमों की ओट में...

वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें,
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें,

ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई,
गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैनें,

कभी न ख़त्म किया मैंने रोशनी का मुहाज़,
अगर चिराग बुझा तो दिल जला लिया मैनें,

कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था,
वो तीर अपने ही कलेजे पे खा लिया मैनें।

गम ए दुनिया मिली ...

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।
गम ए दुनिया मिली  शायरी

शबे ग़म काट चुका...

आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,
अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।
शबे ग़म काट चुका शायरी

2 comments:

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